डिप्रेशन दूर करें – खुशियाँ पाएँ

डिप्रेशन दूर करें – खुशियाँ पाएँ

आजकल ‘डिप्रेशन’ शब्द अक्सर पढ़ने व सुनने को मिल जाता है। वास्तव में ‘डिप्रेशन’ है क्या? यह हमारे दिमाग की वह स्थिति है जब हमारी महत्तवाकाँक्षाएँ दूसरे लोगों की उपलब्धियों के सामने छोटी पड़ जाती हैं या इससे उल्टा हो जाता है। हमें खुशी तब मिलती है जब दूसरे पीछे रह जाते हैं। हमें खुशी तब मिलती है जब हमारे पास सुख सुविधाएँ पड़ोसियों से अधिक होती हैं। या ऐसा ही कोई और कारण। ‘डिप्रेशन’ होने के लिए कई कारणों का इकट्ठा होना जरूरी नहीं होता। कोई एक छोटा सा कारण भी हमें परेशान रख सकता है। इसके लिए उम्र भी मायने नहीं रखती। किसी छोटे से बच्चे को जो अपनी नजर में दूसरों के सामने श्रेष्ठ मानता है, डाँट पड़ जाए तो उसे भी डिप्रेशन हो सकता है। इसका लक्षण तुरंत दिखाई देने लगता है। वह अपना क्रोध प्रकट करने लगता है। बस फर्क इतना होता है कि व्यस्क व्यक्ति अंदर ही अंदर घुटने लगता है और जब उसकी सहनशक्ति खत्म हो जाती है तो उसका व्यवहार ‘एबनार्मल’ हो जाता है और इसे ही ‘डिप्रेशन’ कहते हैं।

लोगों को जब इसका अहसास करवाया जाता है तो कुछ तो मान लेते हैं पर कुछ मानने को ही तैयार नहीं होते और अपनी सोच को उसी नकारात्मकता की ओर धकेलते जाते हैं। धीरे धीरे वे अपने आप को रिश्तेदारों से और समाज से अलग थलग कर लेते हैं। और फिर, उन्हीं रिश्तेदारों और समाज के लोगों को ही गलत ठहराते हैं कि वे ही बदल गए हैं। जबकि हकीकत उससे उलट ही होती है। परिवार में एक सदस्य के डिप्रेशन में जाने से बाकी सभी सदस्यों पर भी इसका असर पड़ता है। घर में हर रोज़ कलह रहने लगता है। छोटी छोटी बात पर तू-तू मैं-मैं होने लगती है। तनाव बढ़ने लगता है। हर वक्त कुछ अनिष्ट होने की शंका बनी रहती है। सब कुछ सामान्य होने पर भी मन विचलित रहता है। अवसाद भरने लगता है।
इससे बचने के कई उपाय सुझाए जा सकते हैं। पर कई उपायों में भटकने से पहले ऐसी स्थति के कारण को जानना आवश्यक होता है। कारण जाने बिना किसी भी उपाय पर अमल करना बेअसर ही रहेगा। किसी ऐसे विश्वसनीय मित्र से बात करें जो निष्पक्ष रह कर आप की बात सुने और यदि आपकी ही गलती हो तो बेझिझक आपको बता सके। मुझसे बहुत से लोग अपनी हर बात शेयर इसीलिए कर लेते हैं कि उनको पूरी तरह सच्चाई समझाई जाती है। असल में सच्चा हितैशी वही होता है जो हमारी कमियाँ भी हमें बताए।

 

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