फालसा- दैवी फल

भारत में गर्मियों का मौसम अपने साथ चिपचिपाती गर्मी, लू तथा बदहज़मी की बहुत सारी बीमारियाँ लेकर आता है लेकिन ऐसे मौसम में कुदरत हमें कुछ ऐसे फल देती है जो इन सभी बीमारियों से दूर रखते हैं। इन फलों में ‘फालसा’ एक ऐसा फल है जो देवताओं का फल कहा जाता है। विकिपीडिया के अनुसार सबसे पहले भारत के वाराणसी में पाया गया था और वहाँ से बौद्ध शिक्षार्थियों द्वारा एशिया के अन्य देशों व पूरे विश्व में ले ज़ाया गया। 

‘ग्रेविया ऐशियाटिका’ नाम का यह फल छोटे, कमजोर व झाड़ीनुमा पेड़ पर क़रीब एक सेंटीमीटर व्यास के गोल दाने जैसा गुलाबी, जामुनी व पकने पर गहरे बैंगनी रंग का होता है। इसका स्वाद हल्का खट्टा व पकने पर मीठा होता है जो गर्मी की वजह से पैदा हुई बीमारियों से लड़ने के लिए हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत बनता है। 

फालसा गुणों की खान:

इस छोटे से फल में एंटीऑक्सीडेंट्स, पोटैशियम, कैल्शियम, विटामिन ए, फ़ॉस्फ़ोरस, प्रोटीन आदि बहुमूल्य गुण बहुत अधिक मात्रा में होते हैं जो हमारे शरीर की कई बीमारियों से लड़ने में हमारी मदद करता है। पके फल की तासीर शीतल व स्वाद मधुर होता है। चलिए जानते हैं कि फालसा के गुणों की खान के क्या-क्या फ़ायदे हैं। 

  1. शरीर की कमज़ोरी दूर करता है।

2. पुरुषों में स्पर्म काउंट को बढ़ाता है।

3. खाने की रुचि बढ़ाता है।

4. मूत्रदोष व स्त्रियों में योनि की जलन व गर्भाशय में होने वाले दर्द को ठीक करता है।

5. वातरोग व गठिया के रोग को ख़त्म करता है।

6. मधुमेह को नियंत्रित करने में मददगार होता है।

7. हड्डियों को मज़बूती प्रदान करता है।हृदय को स्वस्थ रखता है।

8. फालसा लिवर और स्तन कैंसर को रोकने में सहायता करता है।

9. खून की कमी को दूर करता है। 

10. आग से जलने के दर्द को कम करता है। 

11. बुख़ार में राहत दिलाता है। 

आयुर्वेद के अनुसार फालसा की जड़, छाल, पत्ते व फल सभी का उपयोग औषधियों में किया जाता है।

नुक़सान:

फालसा फल का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से एसिडीटी या पेट फूलने की समस्या हो सकती है।

उपलब्धता:

फालसा का पेड़ पूरे वर्ष में केवल एक डेढ़ महीना मई से जून में ही फल देता है। यह फल लम्बे समय तक स्टोर कर के नहीं रखा जा सकता। इसीलिए इस फल को दूर तक ट्रांसपोर्ट नहीं किया जा सकता। इस फल को छाँट छाँट कर तोड़ने में काफ़ी मेहनत करनी पड़ती है। शायद इसी वजह से यह फल बाज़ार में बहुत महँगा मिलता है और अब तो यह  लुप्त प्रायः सा होता जा रहा है। लेकिन इसके गुणों का फ़ायदा अगर कोई लेना चाहता है तो यह घर के आँगन में ही उगाया जा सकता है।

डिस्क्लेमर:

फालसा के गुणों का प्रचार करने के उद्देश्य से लिखा गया यह ब्लॉग इसके द्वारा किसी भी बीमारी के इलाज की गारंटी नहीं देता। उसके लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह आवश्यक है।


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