हिंदी भाषा

हिंदी भाषा सम्मेलनों में भाग लेने के लिए आमंत्रित महानुभाव क्या बता सकते हैं कि उनके अपने बच्चे आम बोलचाल में हिंदी को कितना महत्त्व देते हैं? Share this…

कहानी – सैलाब… आहों के ताप का…

सैलाब… …आहों के ताप का   हर पूर्णिमा की तरह आज भी चाँद पूरा चमक रहा था| दूर- दूर तक आसमां साफ़ दिखाई दे रहा था| सभी तारे टिमटिम टिमटिम करते हुए अपनी आभा बिखेर रहे थे| दूर… एक तारा टूटा| “आह!  पहले भी कई बार टूटा| कई मन्नते मांगी| पर, कुछ ना हुआ| आज एक […]

अंक ताक़तवर या माँ का विश्वास

अंकों से परे योग्यता आजकल दसवीं व बारहवीं कक्षाओं के परिणाम घोषित हो चुके हैं या कुछ होने वाले हैं| हर तरह के मीडिया से नब्बे प्रतिशत से अधिक अंक पाने की ख़ुशी में अभिभावकों की ख़ुशी भी छलक रही है| स्वाभाविक है| हमें अगर पढ़कर इतनी ख़ुशी होती है तो उन्हें तो कई गुना […]

औरत की इतनी दुर्दशा क्यों

     औरत की इतनी दुर्दशा कब तक? यह शाश्वत सत्य है कि औरत पुरुष की अर्धांगिनी है| दोनों एक दुसरे के बिना अधूरे हैं| इस सृष्टि के आदि में जब जीव का विकास हुआ तब से ही नर व मादा दोनों का साथ अत्यंत ज़रूरी रहा है| ब्रह्मा जी की बनायीं हुई इस सृष्टि […]

आ बेटी तुझे प्यार दूँ

आ बेटी तुझे मैं प्यार दूँ ये दुनिया तुझपे वार दूँ छिपा के रखूँ आँचल में ममता का अनमोलोपहार दूँ आ बेटी तुझे मैं प्यार दूँ ये दुनिया तुझपे वार दूँ। जब तू पढ.लिख जाएगी अपनी जगह तू बनाएगी अपने अस्तित्व को बचाना इस माँ को भी सिखाएगी आ बेटी तुझे मैं प्यार दूँ ये […]