क्या चुनावों का मौसम आ गया है?

नेता एक दूसरे को नश्तर चुभो रहे है,
कार्यकर्ता कुर्सियाँ , पत्थर चला रहे हैं;
क्या चुनावों का मौसम आ गया है जो,
सब लोग आपसी भाईचारा दिखा रहे हैँ!

स्याही ने भी अपना धर्म बदल लिया है,
पैरों के जूतों ने अपना कर्म बदल लिया है;
क्या चुनावों का मौसम आ गया है जो,
दोनों ने अपना इस्टाइल बदल लिया है!

सिर की टोपी पर नए नारे लिखे जा रहे हैं,
पीछे चाक़ू सामने सब प्यारे लिखे जा रहे हैं;
क्या चुनावों का मौसम आ गया है जो,
आम जनता के वारे न्यारे लिखे जा रहे हैं!

 

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