ढीठ आदमी

ढीठ आदमी भी क्या चीज़ है
जो इंसा कम
ठूँठ के ज्यादा करीब है|
जिसने फलों से लदे
पेड़ के समान
हवा के झोंकों में
हिलना, लहराना
नहीं सीखा,
जिसने तिनके जैसा सहारा
बनना नहीं सीखा|
बल्कि भांति सूखे ठूंठ की
खड़ा रहा अकड़कर |
जरूरत पड़ने पर
बदलना या
झुकना नहीं सीखा |
वह खड़ा रहेगा यूँ ही
समय के साथ गल जायेगा,
आंधी और तूफानों में
बिना हिले पड़ा रहेगा|
अनमोल जीवन करके बर्बाद
जग से विदा हो जायेगा,
काश, वक्त के साथ बदलना
उसने सीख लिया होता!
काश, औरों को अपना बनाना
उसने सीख लिया होता!

Post Comment