पलकों में सिमटी आँसू की बूँद

पलकों में सिमटी आँसू की बूँद
इंतज़ार कर रही है
कोई आएगा ज़रूर
सपना बुन रही है।

सजाकर गुलदस्ते में
सुनहरी गोटे में लपेटकर
एक प्यारी सी बंद कली
दे जाएगा समेटकर।

वो कली जल्दी ही
खिलेगी प्यार की धूप पर
रंगत निखर आएगी
जवानी की दहलीज़ पर।

तभी आँसू की वह बूँद
नैनों से बह निकलेगी
गीली रेत की लहर पर
कविता बन उभरेगी।

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