बेटी! माँ पापा का गौरव!

बेटी! माँ पापा का गौरव!

बेटियों के महत्त्व पर अनेकों गाथाएँ,  कविताएँ, कहानियाँ व अन्य कई तरह का भारी भरकम साहित्य लिखा गया है। सच भी है कि बेटी माँ पापा का गौरव होती हैं। बेटियों के परिवार में  आने से ख़ुशियाँ आती हैं। रौनक़ आती है। एक माँ बेटी को जन्म देकर अपनी माँ के प्रति उऋण हो जाती है।

और, हम ऋणी हो गए हैं उस माँ के प्रति, जिसने हमारी डायमंड डॉल को जन्म दिया। पाल पोस कर बड़ा किया। शिक्षा दिलवाई। उच्च शिक्षा के लिए बाहर भेजा। आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने के लिए हिम्मत दी। आशीर्वाद दिया। बहुत अच्छे संस्कार दिए… और अपनी वही बेटी जो छोटे भाई के बचपन को अपने चारों ओर दौड़ाती हुई केन्द्र बिंदु “मोटी”, हमें सौंप दी। हमें पूरा अधिकार दे दिया कि हम भी अब उस बेटी पर अपनी बेटी जैसा अधिकार व गर्व करें। धन्य हैं हम उस माँ के जिसने अपने कलेजे के टुकड़े को अपने से दूर करते समय कभी आँखों से बहते हुए आँसुओं को रोक कर चेहरे पर मुस्कराहट दिखाई तो कभी बहने दिया। कभी चुपचाप अपनी बेटी को हमारी बेटी बनते हुए देखती रहीं तो कभी दिल से निकलते हुए भावों को शब्द देकर ऐलान कर दिया कि अब से बेटी साँझी है…

हमारे मन में उनके प्रति कृतज्ञता को कुछ शब्दों में समेटना बहुत ही कठिन है। केवल कोशिश ही कर सकते हैं।

इस छोटे से संदेश के माध्यम से समाज में बेटियों व बहुओं को मान-सम्मान दिलाने की प्रबल इच्छा है…DE3A7BA6-763F-4F8B-A239-D020761CD8F2B810375E-9EB7-415D-A9F7-CD28CB51BC75 CD9DFEFD-2BB1-408F-89D9-F11BB255BA1A F05141DE-86B1-4E65-BEE2-A5ED5C45DA3C E080D8D0-D976-4F05-8144-48B83615A8A7 3FBA7BAE-3F21-4036-BD9E-BCAF90C303C3 50C265B4-7C88-487F-8215-213A874A7B88

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