मुक्तक

मुक्तक

सेहरा में दिल की चाह का खोलते पिटारा जब कभी
मचलते  हमारी मोहब्बत को ज़माने के लोग सभी;
लिखते हैं अहसासों भरी ग़ज़लें सिर्फ तुम्हारे लिए
नहीं करते किसी गैर पर वरना इनायत हम कभी।

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