मेरा दूल्हा- गीत

गंगा मैया में जब तक पानी रहे
मेरे सजना तेरी ज़िंदगानी रहे,
तेरे मेरे बीच में यह लड़ाई भी
कभी कभी तो आनी जानी रहे।

पर शादी से पहले हर युवती की ऐसी ख़्वाहिशें होती हैं जो मैंने ईश्वर से दुआ माँगते हुए इस गीत में लिखी हैं। आप अगर चाहें तो अपने पत्र-पत्रिका के प्रिंट एडिशन में इसे प्रकाशित कर सकते हैं पर मेरा नाम और मेरे पति के साथ मेरी फ़ोटो ज़रूर लगाएँ और मुझे उसकी प्रति भी अवश्य भेजें। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो भगवान से डर कर रहना क्योंकि वह सब देख रहा है।

हाँ तो गीत इस प्रकार है-

मेरा दूल्हा ऐसा भेजना
जैसे हो कोई देवता।

सुबह सवेरे जल्दी उठ जाए
मुझको पलकें चूम जगाए
फैंके मंद मंद मुस्कान
पूरे हो जाएँ अरमान
मेरा दूल्हा ऐसा भेजना
जैसे हो कोई देवता।

नाश्ता खिला के दफ़्तर जाए
वहाँ से मुझको फ़ोन लगाए
होने न दे मुझको बोर
बिना मचाए कोई शोर
मेरा दूल्हा ऐसा भेजना
जैसे हो कोई देवता।

क्रेडिट कार्ड मुझे दे जाए
प्रश्न न कोई पूछ पाए
जैसे मर्ज़ी मौज उड़ाऊँ
तन मन से वारी जाऊँ
मेरा दूल्हा ऐसा भेजना
जैसे हो कोई देवता।

प्यार से मुझको समझाए
मेरी ग़लती ख़ुद पे ले जाए
इज्ज़त करें वो एक बार
मैं करूँगी सौ सौ बार
मेरा दूल्हा ऐसा भेजना
जैसे हो कोई देवता।

सामने कोई न टिक पाए
नित नित आगे बढ़ता जाए
न भटके वो अपनी चाल
आगे बनूँ मैं उसकी ढाल
मेरा दूल्हा ऐसा भेजना
जैसे हो कोई देवता।

 

 

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