माँ की बीमारी का पक्का ईलाज

माँ की बीमारी का पक्का ईलाज
लघु कथा
“डाक्टर साहब देखिए न! माँ का कई बड़े बड़े डाक्टरों से चैक अप करवा लिया। मंहगी से मंहगी दवाई दिला दी। खाने पीने का पूरा ख़्याल रखते हैं। फिर भी माँ संतुष्ट नहीं होती। हर वक़्त हाय हाय लगाए रखती है। सभी डाक्टर कहते हैं कि इसे कुछ नहीं है सिर्फ वहम है। अब बहुत परेशान हो गया हूँ। क्या करूँ, समझ ही नहीं आता। आप हमारे पुराने फ़ैमिली डाक्टर हैं। कृपया कोई उपाय बताइए”, चेहरे पर उदासीनता व परेशानी दिखाते हुए बेटे ने कहा।

डाक्टर कुछ सोच में पड़ गया। थोड़ी देर बाद बोला, “बेटा, अगर तुम्हारी माँ को कोई बीमारी नहीं है और तुम्हारी बात के अनुसार वो हमेशा बीमारी का बहाना बनाती रहती है तो इसे दूसरे नज़रिये से देखना पड़ेगा”।

“बताइए न” बेटे ने उत्सुकता से पूछा।

“इस समस्या का व तुम्हारी माँ की बीमारी का पक्का ईलाज यह है कि तुम ख़ुद उसके पास बैठ कर उससे बातें करो। उसे अपने हाथों से खाना खिलाओ। उसके हाथ अपने हाथ में लेकर वैसे सहलाओ जैसे वह तुम्हारे बचपन में तुम्हारे लिए करती थी। तुम उसे अपनी नन्ही सी बच्ची मानकर उसकी देखभाल ख़ुद अपने हाथों से करो। फिर देखना वह कितनी जल्दी तुम्हारी बेटी की तरह जवान होने लगेगी” डाक्टर ने मज़ाक़ करते हुए नसीहत दे डाली।
कुछ दिनों बाद घर में डाक्टरों का तथा दवाइयों का आना न के बराबर रह गया और माँ को बीमारी का वहम तो बिल्कुल ख़त्म हो गया।
…उषा तनेजा ‘उत्सव’

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